बाल गीत


१ एक थे मिस्टर ऊटपटांग,

ख़ूब मारते अपनी शान,

चोरी से अमरूद तोडने,

चढ़े पेड़ पर इक दिन शाम,

ऊंची डाली पर जब पहुँचे,

फिसल गई तब उनकी टांग,

हाथ नहीं अमरूद लगा,

बस आ धरती पर गिरे धड़ाम।


२ भोर हुई सूरज उग आया,

धरती पर उजियारा छाया,

फूलों ने अपने मुंह खोले,

डाल- डाल पर चिड़िया बोले,

हवा चल रही प्यारी- प्यारी,

बच्चों ने कर ली तैयारी,

बच्चे अब पढ़ने जायेंगे।


३ ज़िंदाबाद! ज़िंदाबाद!

देश हमारा ज़िंदाबाद!

इसने हमको जन्म दिया है,

पढ़ा -लिखाकर बड़ा किया है,

हम पर इसका है उपकार,

हम सब इसको करते प्यार।


४ मुन्नी मेरी राज दुलारी,

मुन्ना सपनों का शहज़ादा,

हम दोनों ने प्यार हमारा,

बांट लिया है आधा- आधा,

इक कंधे पर मुन्नी मेरी,

इक कंधे पर मुन्ना मेरा,

दोनों मिलकर स्कूल जा रहे,

इसमें कोई ना हीरा-फेरी।


५ उठो बाल अब आँखें खोलो,

पानी लायी हूँ मुंह धोलो,

सूरज ने किरणें फ़ैलायी,

चिड़िया चूं- चूं करती आई,

दूध दे गया आकर ग्वाला,

दादी माँ ने उसे उबाला,

दूध पियो ताज़ा हो जाओ,

खुशी- खुशी फिर पढ़ने जाओ।


६ चिड़िया रानी, बड़ी सयानी,

खाना खाकर पीती पानी,

डाल-डाल पर उड़ती रहती,

दिन-भर चूं-चूं करती रहती,

शाम ढले घर को आती है।

चोंच में दाना भर लाती है,

बच्चों को दाना देती है,

चोंच से चोंच मिला देती है,

मेरी माँ भी मुझे खिलाती,

मैं माँ के हाथों से खाती।


७ देश हमारा सबका प्यारा,

इसकी शान बढ़ायेंगे,

जब भी कोई पढ़ी ज़रूरत,

हम इस पर बलिजायेंगे,

दुश्मन से हम नहीं डरेंगे,

उसको मार भगायेंगे।


८ जादूगर ने छढ़ी चलायी,

उसमें से निकली बूढ़ी मायी,

बूढ़ी माई ने खाया घी,

उसमें से निकले पंडितजी,

पंडितजी ने खायी खीर,

उसमें से निकला मियां बशीर,

मियां बशीर ने पाला बकरा,

उसमें से निकला हिरण सुनहरा,

हिरण ने मारी एक छलांग,

खतम कहानी ऊटपटांग।


९ उजला- उजला दिन होता है,

काली - काली रात,

पर दोनों की है हमें ज़रूरत,

दोनों अपने साथ,

रात ना हो तो सोयें कैसे,

दिन में तो हम जागें,

रात में माँ से सुने कहानी,

दिन में पढ़ने भागें,

इसिलिये तो कभी किसी को ,

बच्चों बुरा ना कहना,

सबके अपने अपने गुण हैं,

सबसे मिलकर रहना,

जहां काम तलवार ना आये,

वहां सुई आती है,

छोटी-सी दिखती है लेकिन, कापडे सिलवाती है।